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karma ki kahani

                          कर्म  किसी  को नहीं छोडता  कर्म  एक दर्पण है | जो कुछ भी हमने किसी के साथ किया है, वो आज हमारे सामने है।  भगवान कहते है :   "में किसीका  भाग्य नहीं बनाता हूँ, हर कोई अपना भाग्य खुद बनाता है। तुम आज जो कर रहे हो उसका फल तुम्हे कल प्राप्त होगा और आज जो तुम्हारा भाग्य है वह तुम्हारे पहले किये गए कर्मो का फल है।  एक बार महाराज धृतराष्ट्र ने रोते हुए भगवान कृष्ण से पूछा :मेने ऐसा कोनसा पाप किया है जो मुझे १०० पुत्र की मौत  देखनी पड़ी, मेने तो अपने पिछले १०० भव देख लिए पर ऐसा कोई पाप (कर्म ) नहीं दिखाई दिया, अब आप ही बताओ: मेने ऐसा क्या किया था जो मुझे अपने १०० पुत्र की मौत  देखनी पड़ी? तभी भगवान कृष्ण ने कहा बात १०० जन्म की नहीं है ये उस्से पहले के कर्म है, आज से १०० जन्म पहले आप एक बहोत बड़े सम्राट थे. बड़े संवेदनशील और दयालु थे, आप  बड़े न्यायी थे. आप का न्याय सारी दुनिया में फैला हुआ था सारी दुनिया में आप का...