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Showing posts from September, 2020

PAIN CAN RELEASE TALENTS

                      PAIN CAN CHANGE THE PERSON PAIN CAN CHANGE PEOPLE, WHETHER IT'S IN A GOOD OR BAD WAY.... sometime pain teaches people the ugly truth, some turn a blind eye and focus on smiling again. some  realise the bitterness and MOVE ON. There are two types of pain in this world: pain that hurts you, & pain that changes you pain can unconsciously make a person create boundaries, because when you get  hurt and it's a deep level of hurt, you will automatically build a wall of protection around your heart..because you don 't want the pain to break you anymore.. we don't give life a change to surprise us because we don't want to be disappointed again...we  don't want to fail again..we don't want to feel like we're worthless. pain change person mostly for the better, but when peo ple suffer, they try to do everything they can to avoid it, not as trusting, not as innocent, not as pure...

अपने भाव 33

                                                                    अपने भाव   विचार के बीच से ही कर्म का फल बनता है। इसीलिए सिर्फ शुद्ध विचारों के ही बीज बोने चाहिए। जैसे कि श्रेष्ठ फल की प्राप्ति हो सके। हम क्या करते है इसका महत्व कम है ,परतुं उसे हम किस भाव से करते है इसका महत्व बहुत है।  अंदर के भाव मे बड़ी ताकत होती है। जेसे भाव होते है वेसे कर्मबंदन होते है।  हम कोई भी क्रिया करते है, उसमे भी जेसे भाव होंगे वेसा ही फल मिलेगा। जेसे हम जो बोलते हे वो सामने वालेको पता चलता है , जो हम क्रिया करते है वो दिखाई देता है, पर हमारे अंदर जो विचार चल रहे है वो किसी को भी दिखाई नहीं देते हे,पर उसी भाव से कर्म a/c बनता है   जेसे सुबह में हमने चाय बनाई, गरम गरम चाय हमने कप पे निकाली और  अचानक फोन आ गया और हम ने ये सोचा के चाय तो मुझे गर्म ही पसंद हे...

karma ki kahani

                          कर्म  किसी  को नहीं छोडता  कर्म  एक दर्पण है | जो कुछ भी हमने किसी के साथ किया है, वो आज हमारे सामने है।  भगवान कहते है :   "में किसीका  भाग्य नहीं बनाता हूँ, हर कोई अपना भाग्य खुद बनाता है। तुम आज जो कर रहे हो उसका फल तुम्हे कल प्राप्त होगा और आज जो तुम्हारा भाग्य है वह तुम्हारे पहले किये गए कर्मो का फल है।  एक बार महाराज धृतराष्ट्र ने रोते हुए भगवान कृष्ण से पूछा :मेने ऐसा कोनसा पाप किया है जो मुझे १०० पुत्र की मौत  देखनी पड़ी, मेने तो अपने पिछले १०० भव देख लिए पर ऐसा कोई पाप (कर्म ) नहीं दिखाई दिया, अब आप ही बताओ: मेने ऐसा क्या किया था जो मुझे अपने १०० पुत्र की मौत  देखनी पड़ी? तभी भगवान कृष्ण ने कहा बात १०० जन्म की नहीं है ये उस्से पहले के कर्म है, आज से १०० जन्म पहले आप एक बहोत बड़े सम्राट थे. बड़े संवेदनशील और दयालु थे, आप  बड़े न्यायी थे. आप का न्याय सारी दुनिया में फैला हुआ था सारी दुनिया में आप का...